विश्व को शांति का संदेश देने का पाठ पढ़ा रही है भारतीय संस्कृति: देवव्रत, तीन दिवसीय अखिल भारतीय संस्कृति महोत्सव का हुआ समापन

हिमाचल के राज्यपाल आचार्य डॉ. देवव्रत ने कहा कि भारतीय संस्कृति पूरे विश्व को शांति का पाठ पढ़ा रही है। इस देश की माटी के कण-कण में संस्कृति और संस्कार समाए हुए हैं और इसी धरा पर वेदों की रचना हुई। इन वेदों के एक-एक शब्द में संस्कृति और संस्कारों की महक आती है। इस महक से ही पूरे विश्व को ज्ञान और संस्कारों की शिक्षा भी मिल रही है। राज्यपाल आचार्य डॉ. देवव्रत रविवार को विद्या भारती संस्कृति शिक्षा संस्थान द्वारा आयोजित अखिल भारतीय संस्कृति महोत्सव के समापन समारोह में मुख्यातिथि के रूप में बोल रहे थे। इससे पहले राज्यपाल आचार्य डॉ. देवव्रत, थानेसर के विधायक सुभाष सुधा, विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान के अध्यक्ष डॉ. गोविंद प्रसाद शर्मा, विद्या भारती के राष्ट्रीय संगठन मंत्री जे.एम.काशीपति, विद्या भारती के राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. ललित बिहारी गोस्वामी, विद्या भारती के राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री श्रीराम आरावकर, विद्या भारती संस्कृति शिक्षा संस्थान के सचिव अवनीश भटनागर, उपाध्यक्ष नरेंद्रजीत सिंह रावल, संस्थान के निदेशक एवं अखिल भारतीय संस्कृति महोत्सव के संयोजक डॉ. रामेन्द्र सिंह ने ‘संस्कृति दीर्घा’ का अवलोकन किया और दीपशिखा प्रज्ज्वलित करके समापन समारोह के कार्यक्रम का विधिवत रूप से शुभारम्भ किया। इस दौरान राज्यपाल ने प्रतियोगिताओं में विद्या भारती पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र को ओवरऑल चैंपियन की ट्राफी तथा अखिल भारतीय संस्कृति ज्ञान प्रश्न-मंच एवं पत्र-वाचन प्रतियोगिता के विजेताओं को स्मृति चिह्न व प्रशंसा-पत्र देकर सम्मानित किया। राज्यपाल ने इस अवसर पर विद्या भारती संस्कृति शिक्षा संस्थान द्वारा प्रकाशित ‘बापू से सीखें....’ पुस्तक का विमोचन भी किया। राज्यपाल ने भारत की युवा पीढ़ी को भारतीय संस्कृति और संस्कारों से आत्मसात करवाने के उद्देश्य से आयोजित अखिल भारतीय संस्कृति महोत्सव के सफल आयोजन पर आयोजकों को बधाई देते हुए कहा कि बालक और बालिका हमारे राष्ट्र की पूंजी हैं। इसलिए राष्ट्र की इस पूंजी को भारतीय सभ्यता, संस्कृति का ज्ञान देना बेहद जरूरी है। आज बदलते परिवेश और संस्कृति मूल्यों की अनदेखी के कारण संस्कारों की कमी दिखाई देने लगी है। जिस राष्ट्र में संस्कृति और संस्कारों की कमी होगी, वह राष्ट्र कभी तरक्की नहीं कर पाता। उन्होंने कहा कि भारत ही एक ऐसा देश है जहां संस्कृति और संस्कारों का पाठ पढ़ाया जाता है। इस शिक्षा और संस्कारों के कारण ही राष्ट्र को विकास की राह पर आगे ले जाने का काम किया जा रहा है। इस देश में धर्म की राह पर चलकर समाज को एक सूत्र में पिरोने का काम किया जाता है। इस देश में आपसी भाईचारे, प्रेम और सद्भावना से रहने की शिक्षा दी जाती है। ऋषि-मुनियों के इस देश में आत्मा को जीतने का प्रयास किया जाता है। इन तमाम पहलुओं को जहन में रखकर भारत सरकार युवा पीढ़ी को संस्कार और अच्छी शिक्षा देने का प्रयास कर रही है ताकि इस देश की गरिमा और गौरव ऊंचा हो तथा भारत फिर से विश्व गुरु बन सके। विद्या भारती के अध्यक्ष डॉ. गोविंद प्रसाद शर्मा ने तीन दिवसीय अखिल भारतीय संस्कृति महोत्सव की गतिविधियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारत की संस्कृति महान होने के साथ-साथ विश्व में सबसे प्राचीन है। जिस देश की संस्कृति मजबूत होगी, वह देश सांस्कृतिक मूल्यों के साथ-साथ तमाम क्षेत्रों में मजबूत होगा। विद्या भारती संस्थान का प्रयास रहता है कि देश की भावी पीढ़ी को शिक्षा के साथ-साथ संस्कारों से सराबोर किया जाए। विद्या भारती के 11 क्षेत्रों में से 10 क्षेत्रों से 200 से अधिक विद्यार्थियों और शिक्षकों ने विभिन्न प्रतियोगिताओं में अपनी भागीदारी सुनिश्चित की है। महोत्सव के संयोजक डॉ. रामेन्द्र सिंह ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि इस महोत्सव की विभिन्न प्रतियोगिताओं में पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र ने ओवरऑल ट्राफी प्राप्त की है और इस महोत्सव में देशभर के प्रतिभागियों ने प्रश्न-मंच, पत्र-वाचन, संस्कृति वार्ता, संस्कृति दीर्घा, सांस्कृतिक संध्या जैसे कार्यक्रमों में उत्साह के साथ भाग लिया। इस कार्यक्रम में राज्यपाल आचार्य डॉ. देवव्रत व विधायक सुभाष सुधा को जयफल और शॉल भेंट कर सम्मानित किया।

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